आजाद भारत की सबसे लम्बी और मजबूत, संगठित, अहिंसक किसान आंदोलन को ऐतिहासिक जीत मिली : अमीर अली अंसारी

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जमशेदपुर : झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा जमशेदपुर नगर अध्यक्ष अमीर अली अंसारी ने कहा कि
आजाद भारत की सबसे लम्बी और मजबूत, संगठित, अहिंसक किसान आंदोलन को ऐतिहासिक जीत मिली है।
तीनों कृषि काला कानून को मोदी सरकार द्वारा आज वापस लिए जाने पर आंदोलन कर रहे किसानों को बधाई देते हुए कहा लगभग एक साल से आंदोलनरत किसानों को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है। पिछले साल सरकार ने तीन नए कानूनों के जरिए कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार का दावा किया था लेकिन हर बदलाव को सुधार नहीं कहा जा सकता ,कुछ विनाश का कारण भी बन सकते हैं।देश ने ऐतिहासिक सुधार के नाम पर नोटबन्दी के भयावह परिणाम को देखा। मोदी के एक गलत फैसले ने लाखों नौकरियां और हजारों जिंदगियां छीन ली।
जीएसटी से जीडीपी बढ़ने का दावा किया,जीडीपी तो नहीं बढ़ा उल्टे अर्थव्यवस्था तबाह हो गया।कोविड19 से लड़ने के नाम पर अचानक बिना किसी तैयारी के पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया।कोरोना तो खत्म नहीं हुआ लेकिन हजारों प्रवासी मजदूरों की जिंदगी सड़कों पर खत्म हो गई।लगातार मोदी सरकार के गलत निर्णयों से देश की जनता त्राहिमाम करने लगी।इन तमाम चीजों में असफल होने के बाद किसानों को बली का बकरा बनाने के लिए चुना गया। कृषि कानून में सुधार और किसानों को नई आर्थिक आजादी के नाम पर एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी फैलाई गई जिसे समय रहते देश के किसानों ने इस झांसे को भांप लिया और मोदी सरकार के विरोध में जोरदार आंदोलन छेड़ दिया।
इस काले कानून के जरिए बड़े कॉरपोरेट घरानों को बिना किसी लाइसेंस व कानून के दायरे में आए किसानों के फसल की खरीद बिक्री करने की खुली छूट दी गई।यह छूट ऐसी थी जिसमें आने वाले वक्त में एपीएमसी मंडियों की प्रासंगिकता को ही समाप्त करने की साजिश शामिल थी।इस बेतुके कानून से सरकार को बाजार में खरीद बिक्री और कीमत की न कोई जानकारी होती न ही कोई नियंत्रण होता ।सरकार झूठा प्रचार कर रही थी कि हम मंडियों में सुधार के लिए यह कानून लेकर आ रहे हैं लेकिन सच तो यह था कि कानून में कहीं भी मंडियों में सुधार का ज़िक्र तक नहीं था।सरकार इस कानून के जरिए किसानों को सीधे कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही थी।सबको पता है निजी टेलीकॉम कंपनियों के आगे सरकारी बीएसएनएल कम्पनी कैसे बर्बाद हो गई।
मोदी हुकूमत द्वारा इस काले कानून के जरिए किसानों के कृषि योग्य भूमि और फसलों पर कॉरपोरेट घरानों के कब्जा को सरकारी मान्यता दी जा रही थी।
बिना किसी राज्य सरकार की सहमति के इस खतरनाक व असंवैधानिक कानून को मोदी द्वारा अपने कॉरपोरेट मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए जबरदस्ती किसानों पर थोपा जा रहा था।सैंकड़ों किसानों की शहादत और ऐतिहासिक आंदोलन ने इस साजिश को नाकाम कर दिया और इस दम्भी सरकार को कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर कर दिया।

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